मेरी कलम से

Monday, October 3, 2011

कब याद आते हो


मत पूछो ये मुझसे कि कब याद आते हो
जब जब साँसे चलती हैं बहुत याद आते हो
नींद में पलकें होती हैं जब भी भारी
बनके ख्वाब बार बार नज़र आते हो
महफिल में शामिल होते हैं हम जब भी
भीड़ कि तन्हाईओं में हर बार नज़र आते हो
जब भी सोचा कि फासला रखूँ मैं तुम से
ज़िन्दगी बन कर साँसों में समा जाते हो
खुद को तूफ़ान बनाने कि कोशिश तो की
बन कर साहिल अपने आगोश में समा जाते हो
चाहा ना था मैने इस पहेली में उलझना
हर उलझन का जवाब बन कर उभर आते हो
सूरज की रोशनी, चंदा की चांदनी
आसमान को देखता हूँ मैं जब जब
तुम्हारी कसम बहुत बहुत याद आते हो
अब ना पूछना मुझसे की कब कब याद आते हो******

Wednesday, September 28, 2011

जिंदगी बदल रही है..

*जिंदगी बदल रही है.. *
शायद ज़िन्दगी बदल रही है !!
 जब मैं छोटा था , शायद दुनिया बहुत बड़ी हुआ करती थी ..मुझे याद है मेरे घर से स्कूल तक का वो रास्ता , क्या क्या नहीं था वहां , चाट के ठेले, जलेबी की दुकान , बर्फ के गोले , सब कुछ ,
अब वहां मोबाइल शॉप, विडियो पार्लर हैं, फिर भी सब सूना है .. शायद अब दुनिया सिमट रही है ... 
जब मैं छोटा था , शायद शामे बहुत लम्बी हुआ करती थी. मैं हाथ में पतंग की डोर पकडे , घंटो उडा करता था, वो लम्बी साइकिल रेस वो बचपन के खेल, वो हर शाम थक के चूर हो जाना, अब शाम नहीं होती, दिन ढलता है और सीधे रात हो जाती है.
शायद वक्त सिमट रहा है..
जब मैं छोटा था , शायद दोस्ती बहुत गहरी हुआ करती थी ,दिन भर वो हुज़ोम बनाकर खेलना, वो दोस्तों के घर का खाना , वो लड़कियों की बातें, वो साथ रोना,
अब भी मेरे कई दोस्त हैं ,पर दोस्ती जाने कहाँ है , जब भी ट्रेफिक सिग्नल पे मिलते हैं हाई करतेहैं, और अपने अपने रास्ते चल देते हैं ,होली , दिवाली , जन्मदिन , नए साल पर बस SMS आ जाते हैं
शायद अब रिश्ते बदल रहें हैं ..
जब मैं छोटा था, तब खेल भी अजीब हुआ करते थे, छुपन छुपाई , लंगडी टांग , पोषम पा, टिप्पी टीपी टाप. अब इन्टरनेट, ऑफिस, हिल्म्स, से फुर्सत ही नहीं मिलती .. 
शायद ज़िन्दगी बदल रही है .
जिंदगी का सबसे बड़ा सच यही है.. जो अक्सर कबरिस्तान के बाहर बोर्ड पर लिखा होता है.
"मंजिल तो यही थी, बस जिंदगी गुज़र गयी मेरी यहाँ आते आते"
जिंदगी का लम्हा बहुत छोटा सा है.कल की कोई बुनियाद नहीं हैऔर आने वाला कल सिर्फ सपने मैं ही हैं. अब बच गए इस पल मैं ..तमन्नाओ से भरे इस जिंदगी मैं हम सिर्फ भाग रहे हैं ..
इस जिंदगी को जियो न की काटो !!! 
आपकी शाम हमेशा  क़ी तरह सुहावनी हो........विकास गर्ग 

Thursday, September 22, 2011

उससे कह दो मुझे सताना छोड़ दे


उससे कह दो मुझे सताना छोड़ दे
दूसरो के साथ रहकर मुझे जलाना छोड़ दे ,
या तो कर दे इंकार मुझसे मोहब्बत नहीं
या गुजरते हुए देख मुझे पलटकर मुस्कराना छोड़ दे,
ना कर मुझसे बात कोई गम नहीं है
यू सुन कर मेरी आवाज़ खिड़की पे आना छोड़ दे,
कर दे दिल-ऐ-बयां जो छुपा रखा है
यू इशारो में हाल बताना छोड़ दे,
क्या इरादा है अब बता दे मुझे
यू दोस्तों को मेरे किस्से सुनना छोड़ दे,
है पसंद जो रंग मुझे उसे पहना ना करे 
या उस  लिबास में बार - बार मेरे सामने आना छोड़ दे,
ना कर याद मुझे बेशक तू पर 
किताबो पे नाम लिख कर मेरा उसे  मिटाना छोड़ दे,
अब या तो तू मेरा हो जा 
या सब से मुझे अपना बताना छोड़ दे,

Thursday, September 8, 2011

वो क्या जाने

इन्तहा मोहब्बत की वो क्या जाने,
इम्तेहान ग़ुरबत की वो क्या जाने,
जिन्हें काँटों से बचने की आदत हो,
फूलों से चाहत वो क्या जाने,
जो ना रखते हो ज़मीन पर पैर कभी,
कदमो की आहट वो क्या जाने,
बिन मांगे जिसे मिल जाता हो सब कुछ,
कुछ पाने की शिद्धत वो क्या जाने !

Monday, September 5, 2011

रात जुदाई की

अंगड़ाई पर अंगड़ाई लेती है रात जुदाई की
तुम क्या समझो तुम क्या जानो बात मेरी तन्हाई की

कौन सियाही घोल रहा था वक़्त के बहते दरिया में
मैंने आँख झुकी देखी है आज किसी हरजाई की

वस्ल की रात न जाने क्यूँ इसरार था उनको जाने पर
वक़्त से पहले डूब गए तारों ने बड़ी दानाई की

उड़ते-उड़ते आस का पंछी दूर उफ़क़ में डूब गया
रोते-रोते बैठ गई आवाज़ किसी सौदाई की

Friday, September 2, 2011

एक पगली


एक पगली न जाने क्यू
मुझको देखकर मुस्कुराती थी
जब मैं उसको बुलाता तो
वो जाने क्यू इतराती थी
जब जब मैं उसको देखता तो
मै सोचा करता था
लगता था जैसे उसकी याद मुझे सताती थी
उसको देखना मुझे अच्छा लगता था
और मुझको देखकर वो मुसकराती थी
मै जब उससे कहता
मै तुमसे प्यार करता हूँ
फिर वो मुझको पागल बताती थी
जब कभी मै उदास हो जाया करता था
आकर मेरे पास मुझे खूब हंसाती थी
जब मै उसकी चोटी खीचा करता था
कुछ देर के लिए वो रूठ जाती थी
प्यार की बाते समझी जब वो
मुझको अपना खुदा बताती थी
छोडकर ना जाना तुम मुझको
साथ जीने मरने की कसमे खाती थी
साथ जीने मरने की कसमे खाती थी

एक पगली न जाने क्यू
मुझको देखकर मुस्कुराती थी

Wednesday, August 31, 2011

ईद मुबारक

आप सभी को हमारी और से ईद की बहुत बहुत मुबारकबाद

Friday, August 26, 2011

क्या भारत गरीब है ?



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दर्द होता रहा छटपटाते रहे,
आईने॒ से सदा चोट खाते रहे,
वो वतन बेचकर मुस्कुराते रहे
 हम वतन के लिए॒ सिर कटाते रहे 
280 लाख करोड़ का सवाल है ...
भारतीय गरीब है लेकिन भारत देश कभी गरीब नहीं रहाये कहना है स्विस बैंक के डाइरेक्टर का.


स्विस बैंक के डाइरेक्टर ने यह भी कहा है कि भारत का लगभग 280 लाख करोड़ रुपये उनके स्विस बैंक में जमा हैये रकम इतनी है कि भारत का आने वाले 30 सालों का बजट बिना टैक्स के बनाया जा सकता है
या यूँ कहें कि 60 करोड़ रोजगार के अवसर दिए जा सकते हैया यूँ भी कह सकते है कि भारत के किसी भी गाँव से दिल्ली तक 4 लेन रोड बनाया जा सकता है

ऐसा भी कह सकते है कि 500 से ज्यादा सामाजिक प्रोजेक्ट पूर्ण किये जा सकते हैये रकम इतनी ज्यादा है कि अगर हर भारतीय को 2000 रुपये हर महीने भी दिए जाये तो 60 साल तक ख़त्म ना होयानी भारत को किसी वर्ल्ड बैंक से लोन लेने कि कोई जरुरत नहीं जरा सोचिये ... हमारे भ्रष्ट राजनेताओं और नोकरशाहों ने कैसे देश को लूटा है और ये लूट का सिलसिला अभी तक 2011 तक जारी हैइस सिलसिले को अब रोकना बहुत ज्यादा जरूरी हो गया हैअंग्रेजो ने हमारे भारत पर करीब 200 सालो तक राज करके करीब 1 लाख करोड़ रुपये लूटामगर आजादी के केवल 64 सालों में हमारे भ्रष्ट राजनेताओं  ने 280 लाख करोड़ लूटा हैएक तरफ 200 साल में 1 लाख करोड़ है और दूसरी तरफ केवल 64 सालों में 280 लाख करोड़ हैयानि हर साल लगभग 4.37 लाख करोड़या हर महीने करीब 36 हजार करोड़ भारतीय मुद्रा स्विस बैंक में इन भ्रष्ट लोगों द्वारा जमा करवाई गई है. 

भारत को किसी वर्ल्ड बैंक के लो की कोई दरकार नहीं हैसोचो की कितना पैसा हमारे भ्रष्ट राजनेताओं और उच्च अधिकारीयों ने ब्लाक करके रखा हुआ है

हमे भ्रस्ट राजनेताओं और भ्रष्ट अधिकारीयों के खिलाफ जाने का ूर्ण अधिकार है.हाल ही में हुवे घोटालों का आप सभी को पता ही है - CWG घोटाला जी स्पेक्ट्रुम घोटाला , आदर्श होउसिंग घोटाला,
 
और ना जाने कौन कौन से घोटाले अभी उजागर होने वाले है ........
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Wednesday, August 17, 2011

लौट आना




शाम होने से पहले लौट आना 
किसी के नाम होने से पहले लौट आना
हम तो अब भी आप के इंतजार में हैं
अंजान होने से पहले लौट आना
सुबह शाम रहती है आप के दीदार की उम्मीद
दिन ख़तम होने से पहले लौट आना
अगर न लौट पाओ तो बस इतना कर देना
मेरी आखरी साँस लेने से पहले लौट आना

शाम होने से पहले लौट आना 
किसी के नाम होने से पहले लौट आना

विकास 

Sunday, August 14, 2011

अन्ना हजारे का पत्र मनमोहन सिंह के नाम

डॉ. मनमोहन सिंह 14.08.2011
प्रधानमंत्री
भारत सरकार
नई दिल्ली

प्रिय डॉ. मनमोहन सिंह जी!
मुझे यह पत्र आपको बेहद अफसोस के साथ लिखना पड़ रहा है। मैंने 18 जुलाई 2011 को लिखे एक पत्र में आपको कहा था कि अगर सरकार संसद में एक सख्त लोकपाल बिल लाने का अपना वादा पूरा नहीं करती है तो मैं 16 अगस्त से फिर से अनिश्चिकालीन उपवास शुरू करूंगा. मैंने कहा था कि इस बार हमारा अनशन तब तक जारी रहेगा जब तक 'जनलोकपाल बिल' के तमाम प्रावधान डालकर एक सख्त और स्वतंत्र लोकपाल बिल संसद में नहीं लाया जाता. जंतर मंतर पर अनशन करने के लिए, हमने 15 जुलाई 2011 को पत्र लिखकर आपकी सरकार से अनुमति मांगी थी. उस दिन से लेकर आज तक हमारे साथी दिल्ली पुलिस के अलग-अलग थानों, दिल्ली नगर निगम, एनडीएमसी, सीपीडब्ल्यू डी, और शहरी विकास मंत्रालय के लगभग हर रोज चक्कर काट रहे हैं. अब हमें बताया गया है कि हमें केवल तीन दिन के लिए उपवास की अनुमति दी जा सकती है. मुझे समझ में नहीं आता कि लोकशाही में अपनी बात कहने के लिए इस तरह की पाबन्दी क्यों? किस कानून के तहत आप इस तरह की पाबन्दी लगा सकते हैं? इस तरह की पाबन्दी लगाना संविधान के खिलाफ हैं और उच्चतम न्यायालय के तमाम निर्देशों की अवमानना हैं. जब हम कह रहे हैं कि हम अहिंसापूर्वक, शांतिपूर्वक अनशन करेंगे, किसी को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएंगे तो यह तानाशाही भरा रवैया क्यों? देश में आपातकाल जैसे हालात बनाने की कोशिश क्यों की जा रही है?
संविधान में साफ-साफ लिखा है कि शांतिपूर्वक इकट्ठा होकर, बिना हथियार के विरोध प्रदर्शन करना हमारा मौलिक अधिकार है. क्या आप और आपकी सरकार हमारे मौलिक अधिकारों का हनन नहीं कर रहे? जिन अधिकारों और आज़ादी के लिए हमारे क्रांतिकारियों और स्वतंत्रता सेनानियों ने कुर्बानी दी, स्वतंत्रता दिवस के दिन पहले क्या आप उसी आज़ादी को हमसे नहीं छीन रहे हैं? मैं सोच रहा हूं कि 65 वें स्वतंत्रता दिवस पर आप क्या मुंह लेकर लाल किले पर ध्वज फहराएंगे?
पहले हमें जंतर मंतर की इजाज़त यह कहकर नहीं दी गई कि हम पूरी जंतर मंतर रोड को घेर लेंगे और बाकी लोगों को प्रदर्शन करने की जगह नहीं मिलेगी. यह सरासर गलत है क्योंकि पिछली बार हमने जंतर मंतर रोड का केवल कुछ हिस्सा इस्तेमाल किया था. फिर भी हमने आपकी बात मानी, और चार नई जगहों का सुझाव दिया- राजघाट, वोट क्लब, रामलीला मैदान और शही पार्क. रामलीला मैदान के लिए तो हमें दिल्ली नगर निगम से भी अनुमति मिल गई थी लेकिन आपकी पुलिस ने इस मुद्दे पर कई दिन भटकाने के बाद चारों जगहों के लिए मना कर दिया. मना करने के पीछे एक भी जगह के लिए कोई वाजिब कारण नहीं था. सिर्फ मनमानी भरा रवैया था. हमने कहा आप दिल्ली के बीच कोई भी ऐसा स्थान दे दीजिए जो मेट्रो और बसों से जुड़ा हो, अंततः हमें जे.पी. पार्क दिखाया गया, जो हमने मंजूर कर लिया. अब आपकी पुलिस कहती है कि यह भी केवल तीन दिन के लिए दिया जा सकता है. क्यों? इसका भी कोई कारण नहीं बताया जा रहा. माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेशों में साफ-साफ कहा है कि सरकार मनमाने तरीके से लोगों के इस मौलिक अधिकार का हनन नहीं कर सकती.
क्या इन सबसे तानासाही की गंध नहीं आती? संविधान के परखच्चे उड़ाकर, जनतंत्र की हत्या कर, जनता के मौलिक अधिकारों को रौंदना क्या आपको शोभा देता है?
लोग कहते हैं कि आपकी सरकार आज़ादी के बाद की सबसे भ्रष्ट सरकार है. हालांकि मेरा मानना है कि हर अगली सरकार पिछली सरकार से ज्यादा भ्रष्ट होती है. लेकिन भ्रश्टाचार के खिलाफ़ आवाज़ उठाने वालो को कुचलना, यह आपके समय में कुछ ज्यादा ही हो रहा है. स्वामी रामदेव के समर्थकों की सोते हुए आधी रात में पिटाई, पुणे के किसानों पर गोलीबारी जैसे कितने ही उदाहरण हैं जो आपकी सरकार के इस चरित्र का नमूना पेश करते हैं. यह बहुत चिंता का विषय है.
हम आपको संविधान की आहूति नहीं देने देंगे. हम आपको जनतंत्र का गला नहीं घोंटने देंगे. यह हमारा भारत है. इस देश के लोगों का भारत. आपकी सरकार तो आज है, कल हो न हो.
बड़े खेद की बात है कि आपके इन ग़लत कामों की वजह से ही अमेरिका के हमारे लोकतंत्र के आंतरिक मामलों में दखल देने की हिम्मत हुई. भारत अपने जनतांत्रिक मूल्यों की वजह से जाना जाता रहा है. लेकिन अंतराष्ट्रीय स्तर पर आज उन मूल्यों को ठेस पहुंची है. यह बहुत ही दुख की बात है.
मैं यह पत्र इस उम्मीद से आपको लिख रहा हूं कि आप हमारे मौलिक अधिकारों की रक्षा करेंगे. क्या भारत का प्रधानमंत्री दिल्ली के बीच अनशन के लिए हमें कोई जगह दिला सकता है? आज यह सवाल मैं आपके सामने खड़ा करता हूं.
आपकी उम्र 79 साल है. देश के सर्वोच्च पद पर आप आसीन हैं. जिंदगी ने आपको सब कुछ दिया. अब आपको जिंदगी से और क्या चाहिए. हिम्मत कीजिए और कुछ ठौस कदम उठाइए.
मैं और मेरे साथी, देश के लिए अपना जीवन कुर्बान करने के लिए तैयार हैं. 16 अगस्त से अनशन तो होगा. लाखों लोग देश भर में सड़कों पर उतरेंगे. यदि हमारे लोकतंत्र का मुखिया भी अनशन के लिए कोई स्थान देने में असमर्थ रहता है तो हम गिरफ्तारी देंगे और अनशन जेल में होगा.
संविधान और लोकतंत्र की रक्षा करना आपका परम कर्तव्य है. मुझे उम्मीद है कि आप मौके की नज़ाकत को समझेंगे और तुरंत कुछ करेंगे.

भवदीय,
अन्ना हज़ारे

Wednesday, August 10, 2011

देश की सबसे बड़ी समस्या

आज़ादी का मतलब
हिन्दुस्तान हमारा है
आज़ादी पर मर मिट जाना
एक अरब को प्यारा है

मित्रो! आज़ादी का मतलब
निर्भय भारत-माता है
आज़ादी का अर्थ दूसरा
भारत भाग्य-विधाता है

न जाने आज देश कितनी ही समस्याओ से गुजर रहा है पर इस देश की सबसे बड़ी समस्या और कुछ नही बस अपने ही मन से देश के लिए प्यार का ख़तम हो जाना है. हम केवल अपने देश से बहार ही देखते है की वह क्या है, बस यही सोचते है की यह कुछ नही है. बस कैसे भी मौका लगे और हम विदेश चले जाये, यही खव्वाब लेकर हम बड़े होते है.  "हम लाये है तूफ़ान से कश्ती निकल के , इस देश को रखना मेरे बच्चो  संभल के " हमारे महापुरुषों की ये पंक्तिया हम हर २६ जनवरी और १५ अगस्त को सुनते है और २७ जनवरी तथा १६ अगस्त को भूल जाते हैI हमारे महापुरुष शायद ज्यादा  दूरदर्शी नही थे, क्योकि अगर होते तो उन्हें पता होता की जिन हाथो में वो देश को सोप कर जा रहे है क्या वो हाथ इस ज़िम्मेदारी को उठा पायेगे. आज देश को सँभालने की जब भी बात आती है तो एक ही बात हमारी जुबा पे आती है कि इस देश ने आखिर हमे दिया क्या है, लेकिन हम अपने आप से कभी ये नही पूछते कि हमने आखिर इस देश को क्या दिया. बस यही देखते है की वो देश के लिए कुछ नही कर रहा तो मैं भी क्यों करू. पर शुरुआत तो किसी को करनी होगी. किसी एक को तो महात्मा का चोला ओड़ना होगा.  और शय ये काम वो आसानी से कर सकते है जिनके हाथो में देश की बागडोर है. क्योकि उन्हें हम अपना प्रतिनिधि मानते है. उन्हें इस देश को एकजुट करना होगा. प्रेम भाईचारे का भाव पैदा करना होगा. कुर्सी के लिए नही देश के लिए कुछ कर दिखाना होगा.  देश का क़ानून है कि अगर आपका कोई आपराधिक प्रमाण है तो आपको सरकारी नौकरी नही मिल सकती लेकिन वही देश की बागडोर सँभालने वाला यदि अपराधी भी है तो उस से कोई नही पूछता, बस दे दिया जाता है देश उसके हाथो में और ज्यादा छलनी होने को. अतः हल तो केवल एक ही है कि पहले हम खुद को बदले, एक होकर, एक आवाज़ उठाये उन दुश्मनों के खिलाफ जो इसी देश के होकर इसे ही खोखला बना रहे है. अपना ज़मीर हम इस कदर पवित्र कर ले  कि उन जैसो के हाथ में देश न जाने दे जो नापाक इरादे रखते है. संघर्षशील और अच्छी सूझबूझ रखने वाली एक युवाशक्ति की ज़रुरत है. ऐसे युवाओ को आगे लाये, अपने वोट का सही उपयोग करे, वो मेरा मित्र है वो मेरा पडोसी है ये न सोच कर वोट उसे दे जो सही मायनो में इस देश कि बागडोर सँभालने के लायक हो. ऐसे युवाओ को देश देकर देखे, देश तो आगे बढेगा ही और हमें भी आगे बढाएगा और फिर पूछना अपने आप से कि आखिर हमारे देश ने हमें दिया क्या है.
भारत माँ के अमर सपूतों,
पथ पर आगे बढ़ाते जाना.
पर्वत नदियाँ और समंदर,
हंस कर पार सभी कर जाना.

आज़ादी का बिगुल


आज़ादी का बिगुल बजा जब,
चमका गगन में तारा था,

Friday, August 5, 2011

जिन्दगी


बादलों पे पाऊँ रख के आसमान को छू लिया
 जो कभी किया ना था वो आज मैंने किया
 रही ना कोई आरजूपाया है मैंने वो सुकून
 ख्वाहिशों के हाथ में सोंप दी है ज़िन्दगी
 खूब है, ख़ास है, अब खवाब सी है ज़िन्दगी
हर पल लगता है एक नया विश्वास है जिन्दगी

Tuesday, August 2, 2011

समझ नहीं आता

कभी जमीं तो कभी आसमा समझ में नहीं आता

इस दिल का ठिखाना भी समझ में नहीं आता
मेरी आँखे आपके यादो का चिराग तो नहीं 
क्यों आये सिर्फ आप ही नज़र समझ में नहीं आता 
चाहे अनचाहे मैं आपको याद किया करता हूँ 
ये आदत है या जरुरत समझ में नहीं आता 
पागल सा बनकर रह गया हु कुछ सोच सोच कर
पहले हंसू या रोऊ कुछ समझ में नहीं आता

विकास

Friday, July 22, 2011

जब भी होता है तेरा जिक्र


जब भी होता है तेरा जिक्र कहीं बातों में
लगे जुगनू से चमकते हैं सियाह रातों में
खूब हालात के सूरज ने तपाया मुझको
चैन पाया है तेरी याद की बरसातों में
रूबरू होके हक़ीक़त से मिलाओ आँखें
खो ना जाना कहीं जज़्बात की बारातों में
झूठ के सर पे कभी ताज सजाकर देखो
सच ओ ईमान को पाओगे हवालातों में
आज के दौर के इंसान की तारीफ़ करो
जो जिया करता है बिगड़े हुए हालातों में
आप दुश्मन क्यों तलाशें कहीं बाहर जाकर
सारे मौजूद जब अपने ही रिश्ते नातों में
सबसे दिलचस्प घड़ी पहले मिलन की होती
फिर तो दोहराव है बाकी की मुलाक़ातों में
गीत भँवरों के सुनो किससे कहूँ मैं 
जिसको देखूँ वो है मशगूल बही खातों में

Wednesday, July 20, 2011

आंशु भर आते है आँखों में

आंशु भर आते है आँखों में हर एक हंसी के बाद !
गम बन गया नसीब मेरा हर ख़ुशी के बाद !! 
निकला था कारवा मोहब्बत की राह में !
हर मोड़ पे नफरत खडी थी हर गली के बाद !!
सोचा था प्यार का मैं संजोउगा गुलशन ! 
हर फूल जल गया मेरा बनकर कली के बाद !!
चाहत की बेबसी का ये कैसा हैं इम्तिहान !
दिल ने ना सकू पाया कभी दिल लगाने के बाद !! 
अब राख़ ही समेटता हूँ आशियाने की ! 
खुद ही जला दी थी जिसे आजादी के बाद !!
सुनते है बाद मरने के मिलता है सब सिला ! 
देखेगे क्या मिलेगा मुझे जिन्दगी के बाद !!

Tuesday, July 19, 2011

तन्हाई में मेरी

तन्हाई में मेरी मुस्कुराती है तू
ख्वाब में मेरे आती है तू
ओस की बूंद की तरह
जिस्म पे गिर दिल से गुजर जाती है तू
जब तन्हाई में मेरी मुस्कुराती है तू...

हर शाम तुझको सजाता हूं मैं
आंखों में नमी की तरह
होठों पे शबनम की तरह
जब याद आती है तू
तन्हाई में मेरी मुस्कुराती है तू

Saturday, July 16, 2011

एक लड़की मुझे सताती है

अंधेरी-सी रात में एक खिड़की डगमगाती है
सच बताऊँ यारों तो, एक लड़की मुझे सताती है।
भोली भाली सूरत उसकी मखमली-सी पलकें है
हल्की इस रोशनी में, मुझे देख शर्माती है
सच बताऊँ यारों तो इक लड़की मुझे सताती है
बिखरी-बिखरी ज़ुल्फ़ें उसकी शायद घटा बुलाती है,
उसके आँखों के काजल से बारिश भी हो जाती है
दूर खड़ी वो खिड़की पर मुझे देख मुसकुराती है।
सच बताऊँ यारों तो इक लड़की मुझे सताती है
उसकी पायल की छम-छम से एक मदहोशी-सी छा जाती है
ज्यों की आंख बंद करूँ मैं तो, सामने वो जाती है
सच बताऊँ यारों तो इक लड़की मुझे सताती है
ज्यों ही आँख खोलता हूँ मैं तो ख़्वाब वो बन जाती है
अंधेरी-सी रात में एक खिड़की डगमगाती है
रोज़ रात को इसी तरह इक लड़की मुझे सताती है

Thursday, July 7, 2011

तेरे लिए

लिखी है ये गजल सिर्फ तेरे लिए
दीवाना बना भी तो सिर्फ तेरे लिए
किसी को नहीं देखेंगी ये निगाहे 
नज़र तरसेगी भी तो सिर्फ तेरे लिए
हर साँस में याद करूँगा तुझे 
साँस निकलेगी भी तो सिर्फ तेरे लिए
हर प्यार से प्यारी लगती हो तुम मुझे
मैंने प्यार सिखा भी तो सिर्फ तेरे लिए
जब भी बारिश हुई तो तेरी याद आई
और बारिश में मैं भीगा भी तो सिर्फ तेरे लिए
हंसी तो कब की मेरे लबो से रूट गयी
मगर जिस रोज भी हंसा तो वो हंसी भी होगी सिर्फ तेरे लिए
लिखी है ये गजल सिर्फ तेरे लिए
दीवाना बना भी तो सिर्फ तेरे लिए
विकास गर्ग

Sunday, July 3, 2011

भगवन् है दोस्ती


फूलों सी नाजुक चीज है दोस्ती,
सुर्ख गुलाब की महक है दोस्ती,

सदा हँसने हँसाने वाला पल है दोस्ती,
दुखों के सागर में एक कश्ती है दोस्ती,

काँटों के दामन में महकता फूल है दोस्ती,
जिंदगी भर साथ निभाने वाला रिश्ता है दोस्ती,

रिश्तों की नाजुकता समझाती है दोस्ती,
रिश्तों में विश्वास दिलाती है दोस्ती,

तन्हाई में सहारा है दोस्ती,
मझधार में किनारा है दोस्ती,

जिंदगी भर जीवन में महकती है दोस्ती,
किसी-किसी के नसीब में आती है दोस्ती,

हर खुशी हर गम का सहारा है दोस्ती,
हर आँख में बसने वाला नजारा है दोस्ती,

कमी है इस जमीं पर पूजने वालों की
वरना इस जमीं पर भगवन् है दोस्ती

Saturday, July 2, 2011

कल तेरी तस्वीर देखी तो याद आया


कल तेरी तस्वीर देखी तो याद आया 
हम भी कभी मोहब्बत किया करते थे
जब तेरे शहर मे रहा करते थे 
हम भी चुपचाप जिया करते थे
आँखों में प्यास हुआ करती थी 
दिल में तूफान उठा करते थे
कल तेरी तस्वीर देखी तो याद आया 
हम भी कभी मोहब्बत किया करते थे
लोग आते थे ग़ज़ल सुनाने
हम तेरा जिक्र किया करते थे
किसी वीराने में तुझसे मिलकर
दिल में क्यों फूल खिला करते थे
कल तेरी तस्वीर देखी तो याद आया 
हम भी कभी मोहब्बत किया करते थे
घर की दिवार सजाने की खातिर 
हम तेरा नाम लिखा करते थे
तेरा नाम ही जीने का सहारा था 
तेरा नाम लेकर ही जिया करते थे
कल तेरी तस्वीर देखी तो याद आया 
हम भी कभी मोहब्बत किया करते थे