मेरी कलम से

Sunday, May 22, 2011

मैं तुमसे प्यार करता हूँ

नज़र आता नहीं मुझको तुमसे खूबसूरत कोई 
अगर है कोई और तो मैं इनकार करता हूँ 
अगर जो हो कोई ऐसा तो होता रहे जग में 
ये तुम हो तुम जिससे मैं इतना प्यार करता हूँ

नज़र आते नहीं तुम तो भी सदा दिखते हो मुझको तुम 
मैं हर लम्हा तुझे देखने को दिल बेक़रार करता हूँ 
ये मान लो या ना मानो तुम, मैं तुमसे प्यार करता हूँ 

रहा मैं खुश हर उस पल में जो बिताया था तेरे साथ 
खुदा से माँगा है तुझको मैंने, और अब मैं इंतजार करता हूँ 
कहो कितना की तुमको नहीं है, पर मैं तुमसे प्यार करता हूँ

तेरी ही खुशबु है भरी ये मेरे रोम रोम में
है तू सच में मेरा या मैं सिर्फ तेरा इश्तिहार करता हूँ 
रहो यही या तुम कही भी मैं तुमसे प्यार करता हूँ 

7 comments:

  1. बहुत ही भावुक रचना.....
    हार्दिक बधाई।

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  4. विकास जी,

    क्या बढ़िया लिखा है सच ही तो है....

    नज़र आता नहीं मुझको तुमसे खूबसूरत कोई
    अगर है कोई और तो मैं इनकार करता हूँ
    अगर जो हो कोई ऐसा तो होता रहे जग में
    ये तुम हो तुम जिससे मैं इतना प्यार करता हूँ

    आप कभी मेरे ब्लॉग पर भी जरूर आयें..

    आशु
    http://www.dayinsiliconvalley.blogspot.com/
    http://sukhsaagar.blogspot.com/
    http://whatsupsiliconvalley.blogspot.com/

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  5. हर शब्‍द बहुत कुछ कहता हुआ, बेहतरीन अभिव्‍यक्ति के लिये बधाई के साथ शुभकामनायें ।

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  6. अगर आप लोगो का पयार मिलता रहा तो ऐसे ही लिखता रहूँगा

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आपका बहुत - बहुत शुक्रिया जो आप यहाँ आए और अपनी राय दी,हम आपसे आशा करते है की आप आगे भी अपनी राय से हमे अवगत कराते रहेंगे!!
विकास कुमार गर्ग